Dadimaa ki kahaniya in hindi-मेहनती लकड़हारा-हिंदी कहानी

बच्चों की प्यारी प्यारी कहानियां जो आपको बचपन में दादी मां सुनाया करती थी! जब भी हमें दादी मां यह कहानियां सुनाया करती थी तो हमें सुन कर बहुत अच्छा लगता था!और हम बहुत गहरी नींद में सो जाते थे!

दादी मां की कहानियां सुनना बच्चों को आज भी बहुत अच्छा लगता है !

इसलिए हम यहां पर आपके लिए कुछ दादी मां की कहानियां और बच्चों की हिंदी कहानियां लेकर आए हैं हम आशा करते हैं कि कहानी आपको जरूर पसंद आएगी !


मेहनती लकड़हारा-बच्चों की हिंदी कहानी

बच्चों बहुत पुरानी बात है ! एक गांव में एक लकड़हारा रहता था ! वह लकड़हारा बड़ा मेहनती था! वह रोज जंगल में जाता और बहुत सारी लकड़िया काटता और अपने परिवार का पालन पोषण करता!

उस लकड़हारे को पता था कि उसके पास जंगल के अलावा कुछ नहीं है तो वह रोज अपने परिवार को पालने के लिए जंगल में जाकर लकड़ियां काटता रहता था! एक दिन उसने देखा कि जंगल में आग लग गई है ! उस आग को बुझाने के लिए लकड़हारे ने पूरी कोशिश की पर आप को बुझाना नाकाम हो गया था! क्योंकि आग जंगल में बुरी तरह फैल गई थी !

लकड़हारे ने जोर-जोर से आवाज लगाई कि जंगल में आग लग गई है जंगल में आग लग गई पर लकड़हारे की आवाज को किसी ने भी नहीं सुना ! देखते ही देखते जंगल में आग बुरी तरह से फैल गई !

लकड़हारे को पता था कि अगर जंगल में आग लगी तो सारी लकड़िया जल जाएंगी ! और उसके परिवार को खाने के लिए कुछ नहीं मिलेगा और ऐसा ही हुआ जिस जगह पर वह अपने परिवार के लिए लकड़ियां काटता था वह पूरा तहस-नहस हो गया और उसे पता था कि उसके परिवार को अब भूखा ही रहना पड़ेगा जो उसे मंजूर नहीं था!


जंगल को जलता देख कर लकड़हारा जोर जोर से रोने लगा और रोते-रोते एक नदी के किनारे चला गया! उसे बहुत प्यास लगी थी उसने नदी से थोड़ा सा पानी पिया पानी पीने के बाद वह फिर जोर जोर से रोने लगा !

उस पानी में एक जलपरी रहती थी ! उस जलपरी ने उस लकड़हारे की रोने की आवाज सुनी और उससे पूछा कौन हो तुम और इस जंगल में क्या कर रहे हो!

और क्यों इतनी जोर जोर से रो रहे हो उसने कहा मैं एक गरीब इंसान हूं और एक लक्कड़हारा हूं मैं लकड़ियां काट के शहर में भेजता हूं !

और अपने परिवार को पालता हूं पर इस जंगल में आग लगने के कारण मेरा जो क्षेत्र था जिससे मैं लकड़ियां काटता था वहां पर सारी आग लग गई है और सारे पेड़ जल गए हैं !

अब मेरे पास लकड़ियां काटने के लिए कुछ भी नहीं है उस परी ने देखा लकड़हारा बहुत मेहनती है! और अपने अपने परिवार की चिंता करता है!

परी ने उसकी बात सुनकर उसे एक वरदान देने की सोची उसने कहा अगर मैं तुम्हें वरदान तो क्या तुम उसे स्वीकार करोगे !

लकड़हारे ने कहा कि क्या आप उस वरदान के बदले मुझसे कुछ मांगूगी तो नहीं ! परी ने कहा मैं तुमसे कुछ नहीं मांगूंगी तो लकड़हारे ने लकड़हारे ने कहा जैसी आपकी इच्छा !

परी ने पूछा बोलो क्या वरदान चाहिए तुम्हें तुम्हें ! लकड़हारे ने कहा यह जंगल जैसा पहले था उसे वैसा ही हरा बना कर दो!

लकड़हारे की बात को सुनकर परी बहुत खुश हुई उसने देखा कि लक्कड़हारा बहुत मेहनती और ईमानदार नेक इंसान है!

उसने कहा कि मैं तुम्हें कुछ देना चाहती हूं उसने लकड़हारे को एक सोने की कुल्हाड़ी थी जो कि जादुई कुल्हाड़ी थी !

उसने कहा तुम इस कुल्हाड़ी को सिर्फ जंगल में लेकर जाओ और कहो पेड़ काट दो ! यह कुल्हाड़ी अपने आप तुम्हारे लिए पेड़ काट देगी!

बस तुम्हें इसे जंगल में अपने साथ लेकर जाना होगा लकड़हारे ने कहा नहीं नहीं मैं पेड़ अपने हाथों से काट लूंगा मुझे अपने हाथ से काम करना अच्छा लगता है!

यह सुनकर परी और भी खुशी हुई और परी ने उसे एक सोने की कुल्हाड़ी उपहार में दे दी कहां की कुल्हाड़ी तुम अपने पास ही रख लो!

मुझे नहीं चाहिए तुम्हारी इच्छा हो उस अनुसार तुम इसे उपयोग में ले सकते हैं चाहो तो तुम उसे जादू से काम में ले सकते हो चाहो तो अपने हाथों से काम में ले सकते हो !

यह सुनकर लकड़हारा बहुत खुश हुआ और अपने गांव की ओर वापस चला गया अपने परिवार के पास !


Moral Of The Story-इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है- सफलता हमेशा मेहनत और ईमानदारी से ही मिलती है!

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